
राजधानी के घनी अबादी वाले वार्डों को स्मार्ट बनाने का काम एक साल बाद भी अधूरा है। जिन 10 वार्डों को स्मार्ट बनाने प्लान बनाया गया, उन वार्डों में सालभर में सिर्फ 10 फीसदी ही काम हो पाए। 90 फीसदी काम सिर्फ फाइलों तक ही अटके हुए हैं, जबकि वार्डों के विकास के लिए एक-एक करोड़ रुपए दिए गए।
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